मुझे आज भी याद है, जब बचपन में हमारे घर के बाहर पापा की नीली बजाज चेतक खड़ी होती थी। उस वक्त वो सिर्फ एक स्कूटर नहीं थी वो घर का हिस्सा थी। पापा ऑफिस जाते, मां सब्ज़ी लेने, और कभी-कभी हम बच्चे पीछे बैठकर घूमने निकल जाते। उस ‘धप-धप’ की आवाज़ आज भी कानों में है।
 

पुरानी यादों का नया रूप

अब वक्त बदला है, पर बजाज चेतक फिर से लौटी है  इस बार इलेक्ट्रिक अंदाज़ में। पहली बार जब मैंने नई चेतक देखी, तो दिल में हल्की मुस्कान आई। वही गोल हेडलाइट, वही क्लासिक बॉडी, लेकिन अंदर पूरी नई टेक्नोलॉजी। कंपनी कहती है कि ये 108 किलोमीटर की रेंज देती है, पर मेरी राय में, शहर की असल ट्रैफिक में ये करीब 80–85 किलोमीटर के बीच टिकती है। और हां, ये बुरा नहीं है।

 

बजाज चेतक के डिजिटल मीटर और प्रीमियम केबिन का क्लोज़ व्यू।

एक दिन पुणे में डीलर से मुलाकात हुई। उसने कहा, “सर, लोग टेस्ट राइड के बाद पुरानी यादों में चले जाते हैं।” सच है। मैंने खुद देखा  40 की उम्र के एक व्यक्ति की आंखें चमक उठीं जब उसने चेतक स्टार्ट की। बोला, “यार, यही तो मेरी जवानी थी।” उस पल मुझे लगा, ये सिर्फ इलेक्ट्रिक स्कूटर नहीं, एक इमोशन है।
 

सवारी में सुकून, पर थोड़ी तकनीकी चुभन

चलाने में चेतक स्मूथ है। थ्रॉटल रिस्पॉन्स हल्का-सा डिले करता है, लेकिन आरामदायक सफर देती है। सीट आरामदेह है, सस्पेंशन थोड़ा सख्त लगता है, खासकर जब सड़क पर उभार हो। लेकिन सबसे ज्यादा जो खलता है, वो इसका सॉफ्टवेयर इंटरफेस। एक बार मेरे टेस्ट राइड के दौरान मोबाइल ऐप बार-बार कनेक्ट नहीं हो रही थी। डीलर ने कहा, “अपडेट आएगा सर, सुधर जाएगा।” सुनने में तो आसान लगता है, पर ₹1.5 लाख की स्कूटर में ये बातें थोड़ा खटकती हैं।


बजाज चेतक इलेक्ट्रिक स्कूटर का पीछे का दृश्य, LED टेललाइट और स्टाइलिश रियर डिज़ाइन के साथ।

डिज़ाइन  पुराना लुक, नया आत्मविश्वास


बजाज ने पुरानी चेतक की आत्मा को बरकरार रखा है। इसका मेटल बॉडी फिनिश, LED लाइट्स, और डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर सब कुछ प्रीमियम फील देता है। अगर आप एक्टिवा या ओला के साथ तुलना करें, तो चेतक की बिल्ड क्वालिटी अलग ही स्तर पर है  भारी, मजबूत, और भरोसेमंद।

 

बजाज चेतक इलेक्ट्रिक स्कूटर का साइड प्रोफाइल, क्लासिक रेट्रो लुक और स्टाइलिश बॉडी डिज़ाइन के साथ।

सीधी बात कहूं, तो बजाज चेतक किसी एक पीढ़ी की याद और दूसरी पीढ़ी की उम्मीद दोनों है। ये परफेक्ट नहीं है, पर इसमें एक इंसानियत है, एक पहचान है। हर बार जब इसे सड़क पर देखता हूं, तो लगता है  कुछ ब्रांड सिर्फ चलते नहीं, ज़िंदा रहते हैं।