धनतेरस त्यौहार हर वर्ष गहरे श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया जाता है। राजस्थान में तो यह त्यौहार खास महत्त्व रखता है क्योंकि यहां कई जगहें ऐसी हैं जहाँ धनतेरस पर अनोखी और पुरानी पूजा विधियाँ होती हैं। इस वर्ष 2025 में भी लोग इन जगहों पर जाकर भाग लेते हैं। इन्हीं जगहों से जुड़ी परंपराएं और रोचक बातें इस लेख में दी जा रही हैं।

 

जैसलमेर की सतरंगी महल में धनतेरस की विशेष पूजा

जैसलमेर का सतरंगी महल धनतेरस पर सजता है खास तरीके से। यहाँ स्थानीय लोग दिन भर पूजा करते हैं, देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की विशेष आराधना की जाती है। सतरंगी महल में धनतेरस की पूजा का तरीका अन्य स्थानों से कुछ अलग है, जिसमें पुष्पों से बने रंग बिरंगे डिजाइन और दीपों की रोशनी शामिल होती है। लोग सोने-चांदी जैसी वस्तुएं लेकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

 

नागौर का सियाराम मंदिर जहाँ धनतेरस की शाम नए रंग भरती है

राजस्थान के नागौर जिले में स्थित सियाराम मंदिर धनतेरस पर एक जीवंत पूजा स्थल बन जाता है। यहां पूजा करने वाले स्थानीय व्यापारी नववर्ष की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं। मंदिर के चारों ओर झांकियां सजाई जाती हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं, जो इस पर्व को और भव्य बनाते हैं।

 

उदयपुर के बांधरा में पारंपरिक धनतेरस पूजा की विशाल परंपरा

उदयपुर के बांधरा क्षेत्र में धनतेरस की पूजा सदियों से एक बड़ी धूमधाम से की जाती है। यहाँ के लोग लकड़ी के बने खास मंच पर दीप जलाकर मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं। धनतेरस के दिन यहां का बाजार भी सजता है और लोग सोने चांदी की खरीदारी कर, परिवार और मित्रों के साथ त्योहार मनाते हैं। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।

 

श्री गंगानगर में धनतेरस पर होने वाली अनूठी मेले की रौनक

श्री गंगानगर में धनतेरस के दिन एक विशेष मेला लगता है जो पूरे इलाके में खुशी का माहौल बनाता है। इस मेले में पूजा के साथ व्यापारियों के लिए भी एक बड़ा मंच रहता है। मेले में आने वाले लोग मां लक्ष्मी की पूजा करने के बाद तिउहार की खुशियों में शामिल होते हैं। यहां की पूजा विधि में लोक गीत और नृत्य की भी खास भूमिका होती है।

 

धनतेरस पर बीकानेर के नारायण मंदिर की विशेष पूजा

बीकानेर का नारायण मंदिर धनतेरस को खास उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यहां भगवान धन्वंतरि की पूजा की परंपरा बहुत प्राचीन है। मंदिर में आरती के दौरान विशेष मंत्रों का उच्चारण होता है और प्रसाद के रूप में मीठा भोग बांटा जाता है। परिवार और श्रद्धालु इस वक्त मंदिर की शांति और पूजा की गहराई में खो जाते हैं।

 

धनतेरस के इस शुभ अवसर पर राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत की झलक

राजस्थान के ये सभी स्थान न केवल धनतेरस की पूजा को खास बनाते हैं, बल्कि यहां की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को भी प्रकट करते हैं। यहां के लोक गीत, नृत्य, और पूजा की विधियां इस पर्व को और भी रंगीन और यादगार बनाती हैं। इस त्यौहार के माध्यम से न केवल धन की वृद्धि की कामना होती है, बल्कि परिवारों और समुदायों की एकजुटता भी देखने को मिलती है।

 

कैसे करें धनतेरस की पूजा सरल और पारंपरिक तरीके से

राजस्थान की इन जगहों से प्रेरणा लेकर आप भी अपने घर पर धनतेरस की पूजा बड़ी सादगी और श्रद्धा के साथ कर सकते हैं। पूजा के दौरान लक्ष्मी जी और धन्वंतरि जी की आराधना करें, दीप जलाएं, और छोटे से मेवे या फल प्रसाद के रूप में रखें। यह त्यौहार केवल धन-सम्पदा के लिए नहीं, बल्कि आत्म-विश्वास और परिवार में खुशहाली के लिए है।

 

धनतेरस 2025 राजस्थान की अनेक जगहों पर है उत्सव की खासि

इस धनतेरस 2025 पर राजस्थान की ये परंपरागत जगहें हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती हैं और त्यौहार के महत्व को गहराई से समझने का मौका देती हैं। चाहे जैसलमेर का सतरंगी महल हो, या उदयपुर का बांधरा, हर जगह की पूजा की अपनी अलग कहानी और महत्ता है। इस त्योहार पर हर कोई अपने परिवार के साथ मिलकर खुशियां मनाता है और नया सौभाग्य पाने की कामना करता है।