बिहार के पूर्णिया जिले में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। जोगबनी से पाटलिपुत्र की ओर जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आकर चार युवकों की जान चली गई। यह हादसा कस्बा रेलवे गुमटी के पास हुआ, जहाँ ये लोग रेलवे ट्रैक के किनारे मौजूद थे।

 

हादसे की पूरी घटना क्या थी और कैसे हुआ यह दुखद वाकया

गुरुवार की शाम जब वंदे भारत ट्रेन अपनी तय गति से जोगबनी से पाटलिपुत्र के बीच अपना सफर तय कर रही थी, तब यह दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। ट्रेन जब कस्बा रेलवे गुमटी के पास पहुंची, उसी समय रेलवे ट्रैक के पास खड़े चार युवक इसकी चपेट में आ गए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ये युवक शायद ट्रेन की आवाज नहीं सुन पाए या फिर वे समझ नहीं पाए कि इतनी तेज गति से आने वाली ट्रेन इतनी जल्दी उनके पास पहुंच जाएगी। वंदे भारत की तेज रफ्तार के कारण यह हादसा चंद सेकंड में ही हो गया।

 

मृतकों की उम्र और पहचान से जुड़ी जानकारी

इस दुखद घटना में जान गंवाने वाले सभी चारों युवकों की उम्र 18 से 25 साल के बीच बताई जा रही है। ये सभी स्थानीय निवासी थे और अपनी जिंदगी की शुरुआत में ही इस तरह से दुनिया छोड़ गए। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान की जा रही है। इनमें से कुछ युवक आसपास के गांव के रहने वाले थे। उनके परिवार वाले घटना की जानकारी मिलते ही रोते-बिलखते घटनास्थल पहुंचे।

 

जोगबनी से पाटलिपुत्र तक चलने वाली इस ट्रेन का पूरा रूट

वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेल की एक आधुनिक और तेज गति वाली ट्रेन है। यह जोगबनी स्टेशन से शुरू होकर पाटलिपुत्र (पटना) तक का सफर तय करती है। इस रूट पर यह ट्रेन कई छोटे-बड़े स्टेशनों से होकर गुजरती है।

इस ट्रेन की खासियत यह है कि यह काफी तेज गति से चलती है और यात्रियों को कम समय में अपनी मंजिल तक पहुंचाती है। लेकिन इसी तेज गति के कारण कई बार ऐसे हादसे भी होते रहते हैं।

 

 

रेलवे ट्रैक पर लोगों के आने-जाने से होने वाले खतरे

यह कोई पहला मामला नहीं है जब रेलवे ट्रैक पर किसी की जान गई हो। अक्सर लोग रेलवे ट्रैक को शॉर्टकट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं या फिर ट्रैक के किनारे बैठकर समय बिताते हैं। लेकिन यह बेहद खतरनाक है।

खासकर वंदे भारत जैसी तेज गति वाली ट्रेनों के मामले में यह खतरा और भी बढ़ जाता है। इन ट्रेनों की आवाज देर से सुनाई देती है और जब तक समझ आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

 

स्थानीय प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की प्रतिक्रिया

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

रेलवे प्रशासन ने इस घटना को लेकर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि वे लगातार लोगों को जागरूक करते रहते हैं कि रेलवे ट्रैक पर न चलें और न ही वहां खड़े हों। फिर भी ऐसी घटनाएं होती रहती हैं।

 

इस हादसे का स्थानीय समुदाय पर प्रभाव

इस दुखद घटना से पूरे इलाके में गम का माहौल है। चारों युवकों के परिवार वाले सदमे में हैं। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि यह बहुत दुखद बात है कि इतने कम उम्र के बच्चों की जान इस तरह चली गई।

स्थानीय लोगों ने अपील की है कि सभी को रेलवे ट्रैक से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन बहुत कीमती है और इसे इस तरह के खतरों में नहीं डालना चाहिए।

 

सुरक्षा उपायों की जरूरत

इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या रेलवे प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। रेलवे ट्रैक के आसपास बेहतर बाड़बंदी और चेतावनी के बोर्ड लगाने की जरूरत है।

साथ ही लोगों को भी समझना होगा कि रेलवे ट्रैक कोई खेल का मैदान नहीं है। यह एक खतरनाक जगह है जहां जाने से बचना चाहिए।