नई दिल्ली: ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव यानी GTRI की नवीनतम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के बाद भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में बड़ी गिरावट आई है। पिछले चार महीनों में भारत के कई प्रमुख उत्पादों की अमेरिकी बाजार में मांग घट गई है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब दुनिया की अर्थव्यवस्था पहले से ही धीमी गति से उबर रही थी।

 

ट्रंप के टैरिफ फैसले से बढ़ा भारतीय उद्योग पर दबाव

GTRI की रिपोर्ट का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आयात पर लगाए गए भारी टैरिफ ने भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले जहां भारत का अमेरिका को निर्यात 35 अरब डॉलर से अधिक था, वहीं अब यह करीब 28 अरब डॉलर के आसपास सिमट गया है।

भारत से अमेरिका को भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में वस्त्र, दवाइयां, रसायन, मशीनरी पार्ट्स और इंजीनियरिंग सामान शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप द्वारा बढ़ाए गए आयात शुल्क की वजह से इन वस्तुओं की अमेरिकी बाजार में कीमतें बढ़ गईं और मांग घट गई।

 

चार महीनों में निर्यात में भारी गिरावट

GTRI आंकड़ों के मुताबिक, जून से सितंबर 2025 के बीच भारत का अमेरिका को निर्यात लगातार घटता रहा। जून में जहां 7 प्रतिशत की गिरावट थी, वहीं सितंबर के अंत तक यह गिरावट 18 प्रतिशत तक पहुंच गई। रिपोर्ट बताती है कि अगर स्थिति यही रही, तो आने वाले तिमाही में यह घाटा और गहरा सकता है।

भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़े निर्यात बाजारों में से एक है। ऐसे में यह गिरावट अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकती है। खासकर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम उद्योग (MSME) पर इसका असर ज्यादा देखा जा रहा है, क्योंकि इनका बड़ा हिस्सा अमेरिकी ऑर्डरों पर निर्भर है।

 

GTRI ने चेताया भारत को नई रणनीति की जरूरत

GTRI ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि भारत को अब अपने निर्यात ढांचे में बदलाव करने की जरूरत है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को यूरोपीय संघ, अफ्रीका और एशियाई देशों के साथ व्यापार संबंध मजबूत करने चाहिए ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब 'मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड' की दिशा में काम करना होगा। घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और नए बाजारों की खोज पर ध्यान देना ही इस संकट से निकलने का रास्ता है।

 

भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ी, उद्योग जगत में भारी असंतोष

निर्यात संगठनों ने ट्रंप के टैरिफ फैसले को "व्यापारिक असमानता" बताया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स (FIEO) ने कहा कि अमेरिकी बाजार भारत के लिए 15 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देने में मदद करता था। अब आदेशों की संख्या घटने से लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।

कई निर्यातक यह भी कह रहे हैं कि अब उनके पास सीमित विकल्प बचे हैं। वे या तो उत्पादन घटाएं या फिर अपने उत्पादों को अन्य देशों में भेजने की तैयारी करें। लेकिन यह प्रक्रिया आसान नहीं है, क्योंकि नए देशों में निर्यात शुरू करने के लिए लंबी मंजूरी प्रक्रिया और स्थानीय बाजार की समझ जरूरी होती है।

 

ट्रंप के कदम से अमेरिका के खुद के बाजार पर भी असर

GTRI रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ट्रंप के टैरिफ निर्णय से अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी झटका लगा है। भारत से आने वाले दवाइयों और रसायनों की कीमत बढ़ने से अमेरिका में कई दवाइयों की कीमत में तेज उछाल आया है। इंजीनियरिंग उपकरण और घरेलू सामान भी पहले की तुलना में महंगे हो गए हैं।

इससे यह साबित होता है कि टैरिफ नीति से न तो केवल भारत को नुकसान हुआ है बल्कि यह अमेरिका के आम उपभोक्ता की जेब पर भी असर डाल रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही, तो यह दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को कमजोर कर सकती है।

 

भारतीय सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

भारत सरकार ने GTRI रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि वे जल्द ही भारतीय उद्योग जगत के साथ बैठक करेंगे ताकि इस मसले पर रणनीतिक कदम उठाए जा सकें।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “भारत अपने निर्यात उत्पादों की विविधता बढ़ाने और नई व्यापारिक संधियों पर काम कर रहा है। हमें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कुछ सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।”

इसके अलावा भारत की कोशिश रहेगी कि अमेरिका के साथ वार्ता के जरिए टैरिफ में राहत मिले। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप का घरेलू उद्योगों के प्रति झुकाव देखते हुए यह कदम फिलहाल कठिन लगता है।

 

GTRI रिपोर्ट ने जो तस्वीर दिखाई वह चुनौती भी है और अवसर भी

GTRI की इस रिपोर्ट ने भारत के लिए कई चुनौतियों के साथ नए अवसरों का भी दरवाजा खोला है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट को अवसर में बदला जा सकता है अगर भारत अब अपने विनिर्माण क्षेत्र को और सक्षम बनाए।

दुनिया आज भी सस्ते और भरोसेमंद उत्पादों की तलाश में है। भारत अगर उत्पादन लागत घटाकर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद दे सके तो यह अन्य बाजारों में अपनी मजबूत जगह बना सकता है। भारत सरकार की निर्यात नीति और वैश्विक साझेदारी इसमें अहम भूमिका निभाएगी।

 

भारत को चाहिए दीर्घकालिक निर्यात नीति

GTRI रिपोर्ट के संदेश साफ हैं — भारत को दीर्घकालिक निर्यात नीति की जरूरत है। विदेशों पर अत्यधिक निर्भरता भारत को कमजोर बनाती है और अप्रत्याशित नीतिगत बदलावों से झटका लग सकता है। भारत को निजी क्षेत्र और सरकार मिलकर ऐसी रणनीति बनानी होगी जो देश को वैश्विक व्यापार में मजबूती दे सके।

ट्रंप के टैरिफ कदम से उत्पन्न यह संकट फिलहाल परेशान करने वाला जरूर है, लेकिन यह भारत के लिए सुधार और विस्तार के अवसर भी लेकर आया है। आने वाले वर्ष भारत के निर्यात और व्यापारिक नीतियों के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।