Bihar News : बेगूसराय में चुनाव ड्यूटी के दौरान पुलिस टीम पर हमला, घायल हुए पांच सुरक्षा कर्मी
बेगूसराय में चुनाव ड्यूटी के दौरान पुलिस टीम पर हमला की खबर ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है। शुक्रवार देर शाम भीठ पुल के पास अवैध शराब कारोबार पर छापेमारी के दौरान पुलिस पर हमला हुआ, जिसमें पांच जवान घायल हो गए। बेगूसराय में चुनाव ड्यूटी के दौरान पुलिस टीम पर हमला चुनावी माहौल में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं और इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
Bihar News बेगूसराय में चुनाव ड्यूटी के दौरान पुलिस टीम पर हमला, घायल हुए पांच सुरक्षा कर्मी
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शाम का वक्त था। बेगूसराय में हवा कुछ ठिठकी हुई लग रही थी। लोग घरों को लौट रहे थे तभी Bihar News में खबर आई — “भीठ पुल के पास पुलिस टीम पर हमला।” पलक झपकते ही पूरा इलाका चर्चा में था। शुक्रवार देर शाम जब पुलिस टीम अवैध शराब कारोबारियों पर छापा मारने गई, तब भीड़ ने अचानक हमला बोल दिया। सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि सुरक्षा बलों को संभलने का भी वक्त नहीं मिला।
भीठ पुल पर हिंसा, अचानक घिरी पुलिस टीम
भीठ पुल वो जगह है जहां अक्सर छोटे अपराधों की सूचना मिलती रहती है। लेकिन शुक्रवार को बात कुछ और थी। पुलिस की टीम यहां बड़ी कार्रवाई के लिए पहुंची थी। गाड़ियों की बत्ती जल रही थी, हथियार थामे जवान उतर रहे थे। तभी कुछ दूर से लोग चिल्लाते दिखे। पलक झपकते दो नहीं, दर्जनों लोग वहां पहुंच गए।
“हम पहले समझे कोई झगड़ा है,” एक पुलिसकर्मी ने बताया, “लेकिन फिर ईंटें चलनी शुरू हो गईं…।” उसके बाद बस अफरातफरी। गाड़ियाँ पलट दी गईं, खिड़कियां टूट गईं। पांच जवान जमीन पर गिर पड़े। बचाव दल को सूचित किया गया, पर तब तक मामला बेकाबू हो चुका था।
ये हमला अचानक नहीं था, पहले से सब तय था – पुलिस अधिकारी
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि भीठ पुल पर हुआ हमला पहले से योजना बनाकर किया गया था। “हमारी टीम जैसे ही पुल पहुंची, 10 मिनट के भीतर 20 से 30 लोग आ गए। उनके पास पत्थर थे, डंडे थे, और गुस्सा भी,” उन्होंने कहा।
मौके पर मौजूद एक अन्य अधिकारी बोला—“हम वहां चुनाव ड्यूटी पर थे। छापेमारी के आदेश शाम में ही मिले थे। पर शराब माफिया पहले से तैयार बैठे थे।” घायल जवानों को तुरंत जिला अस्पताल भेजा गया जहां उनका इलाज जारी है।
चुनावी माहौल में अपराध पर नकेल, मगर खतरे भी बढ़े
Bihar News के अनुसार, चुनाव से पहले पुलिस को कई बार सूचना मिल रही थी कि शराब तस्कर बड़ी खेप लाने की कोशिश में हैं। प्रशासन ने छापेमारी की योजना बनाई लेकिन शायद माफियाओं तक भनक जा चुकी थी। सोशल मीडिया पर वीडियो फैला जिनमें पुलिसकर्मियों पर हमला करते लोग दिख रहे हैं। पुलिस ने इन वीडियो को जांच में शामिल किया है।
आसपास के लोगों का कहना है कि पहले शोर हुआ, फिर सायरन की आवाज़ें और फिर अफरा‑तफरी। “लोग भागे, बच्चे रोए, सब बंद दरवाजों के पीछे छिप गए,” एक दुकानदार ने बताया।
घायल पुलिसकर्मी बोले – ‘हम कानून के लिए लड़ रहे थे, भीड़ के नहीं’
अस्पताल के बिस्तर पर पड़े जवान मोहम्मद आरिफ ने कहा, “हम कानून के लिए लड़ रहे थे, भीड़ के लिए नहीं। हमें लगा हम छापा मारने जा रहे हैं, पर वहां फंस गए।” उसके साथी तारकेश्वर सिंह ने बताया कि हमला बहुत तेजी से हुआ — “दो मिनट में पूरा दांव पलट गया।”
डॉक्टर के मुताबिक, पांच में से दो जवानों को सिर में चोट आई है जबकि तीन को हड्डी में फ्रैक्चर है। सभी खतरे से बाहर हैं, मगर मानसिक तौर पर झटका बड़ा है।
इलाके में तनाव, अतिरिक्त बल तैनात
हमले के बाद रात भर इलाके में तनाव बना रहा। आधी रात तक पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम मौके पर डटी रही। सड़क किनारे सन्नाटा था, सिर्फ टॉर्च की रोशनी और बूटों की आवाज सुनाई दे रही थी।
डीएसपी बेगूसराय ने कहा कि “कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। हम सबके खिलाफ केस दर्ज कर चुके हैं।” प्रशासन ने गांव में चौकसी बढ़ा दी है और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है ताकि किसी नई घटना की आशंका न रहे।
अवैध शराब की छापेमारी बना तनाव का कारण
बिहार में चुनावी सीजन के दौरान शराब कारोबार हमेशा सबसे मुश्किल काम होता है। शराबबंदी लागू है, लेकिन कारोबार जमीन के नीचे फल‑फूल रहा है। पुलिस बताती है कि हर कार्रवाई के बाद तस्कर नए ठिकाने बना लेते हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम हर बार नए सिरे से शुरू करते हैं। पर चुनाव आने पर ये माफिया और बेकाबू हो जाते हैं।” उन्होंने आगे बताया, “इस बार हमला सिर्फ शराबियों का नहीं था, भीड़ में अपराधियों के लोग मिले हुए थे।”
स्थानीय लोग अब भी डरे हुए हैं, रात सन्नाटे में बीती
घटना के बाद गांव में डर का माहौल है। भीठ के पास रहने वाली एक महिला ने कहा, “हम तो सोच रहे थे गोली चलेगी।” बच्चों को रात घर से बाहर निकलने नहीं दिया गया। लोग कहते हैं—“पहले कभी ऐसा नहीं हुआ।”
शनिवार सुबह पुलिस ने फिर से उस इलाके का दौरा किया। दीवारों पर पड़े पत्थरों के निशान आज भी ताज़ा हैं। कई दुकानदारों ने दुकानें बंद रखी हैं। सड़क पर वही खामोशी है जो किसी तूफ़ान के बाद बचती है।
राज्य प्रशासन ने जांच बिठाई, कहा – दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा
राज्य के गृह विभाग ने पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी है। एडीजी कानून व्यवस्था ने कहा कि “यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। जो भी इसमें शामिल पाया गया, सख्त कार्रवाई होगी।”
डीएम बेगूसराय ने आदेश दिया है कि इलाके में CCTV फुटेज और मोबाइल वीडियो की जांच की जाए। “वो दौर लद गया जब पुलिस पर हाथ उठाना आसान था,” उन्होंने मीडिया से कहा।
चुनाव ड्यूटी पर पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सवाल
यह घटना एक और बड़ा सवाल छोड़ गई — जब सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने वाले ही निशाने पर हों, तो आम मतदाता कितना सुरक्षित है? एक अधिकारी ने कहा, “हम चाहते हैं कि चुनाव निष्पक्ष हों, लेकिन इस तरह के हमले आम कानून के डर को कमजोर करते हैं।”
फिलहाल घायल पुलिसकर्मी अस्पताल में हैं और जिला प्रशासन चौकन्ना है। लेकिन यह सच है कि Bihar News में ऐसी घटनाएँ सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की परीक्षा बन जाती हैं। बेगूसराय इस बार फिर सुर्खियों में है — और वजह वही, कानून बनाम अपराध की जंग।
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