पिछले दिनों, Hayli Gubbi volcano जो इथियोपिया के अफ़ार क्षेत्र में स्थित है के लगभग 12,000 साल बाद फटने से निकली राख और गैसों का गुबार हवा में 14 किमी तक ऊपर गया। इस राख के गुबार ने उच्च‑ऊंचाई की हवाओं के जरिए अरब सागर पार कर भारत की तरफ अपना रास्ता बनाया और उसके बाद दिल्ली‑एनसीआर समेत उत्तर-पश्चिमी भारत के कुछ भागों तक पहुँच गया।
राख क्या है और इसके खतरे
राख सामान्य धूल नहीं होती यह बहुत महीन कणों (पानी सिलिका ज्वालामुखीय ग्लास) और साथ में सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसों का मिश्रण होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसे सांस के ज़रिए अंदर लेने से नाक गले और फेफड़ों में खारिश खांसी सांस फूलना अस्थमा या ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं और पहले से फेफड़ों या दिल की बीमारी वाले लोगों पर असर और गंभीर हो सकता है। इसके अलावा सल्फर डाइऑक्साइड जैसे गैसों का मिश्रण हवा में वॉग नामक विषैले बादल बना सकता है जो कण प्रदूषण (PM2.5 जैसी) की तुलना में और ज़्यादा घातक हो सकता है।
दिल्ली एनसीआर पहले से प्रदूषित अब राख की मार
दूसरी ओर दिल्ली एनसीआर कुछ हफ्तों से ही खतरनाक स्तर की वायु प्रदूषण से जूझ रहा है। स्थानीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार ‘बहुत खराब या गंभीर श्रेणी में है। इस बीच, इथियोपिया से आई राख किरणों ने चिंता बढ़ा दी है। हालांकि मौसम विभाग (India Meteorological Department IMD) का कहना है कि राख का गुबार 25000–45000 फीट की ऊँचाई पर है यानी ज़्यादातर समय धरातल तक नहीं आएगा, इसलिए “महत्वपूर्ण वायु प्रदूषण वृद्धि” की संभावना कम बताई जा रही है।
फिर भी, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि सिलिका वोल्कैनिक ग्लास जैसे सूक्ष्म कणों का न्यूनतम संपर्क भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है, खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से अस्थमा या अन्य फेफड़ौ रोग वाले लोगों के लिए।


