प्राकृतिक खेती (Natural Farming): क्या यह भारत के किसानों की किस्मत बदल देगी? 2026 की नई उम्मीद
बिना केमिकल और खाद के खेती का बढ़ता क्रेज़, जानें किसानों को क्या होगा फायदा
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए खेती केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि जीवन जीने का आधार है। पिछले कुछ दशकों में रसायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से जमीन की ऊर्वरा शक्ति कम हुई है और बीमारियाँ बढ़ी हैं। इसी को देखते हुए अब सरकार और किसान ‘प्राकृतिक खेती’ (Natural Farming) की ओर लौट रहे हैं। 2026 तक इसे एक व्यापक आंदोलन बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्राकृतिक खेती क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
प्राकृतिक खेती का अर्थ है ऐसी खेती जिसमें ज़हरीले रसायनों का उपयोग बिल्कुल नहीं होता। इसमें गाय के गोबर, गोमूत्र और स्थानीय वनस्पतियों से बने घोल का उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी की ताकत बढ़ती है और पैदावार की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। उपभोक्ताओं के बीच अब ‘ऑर्गेनिक’ और ‘केमिकल-फ्री’ अनाज की मांग तेजी से बढ़ रही है।किसानों के लिए लागत में कमी
रसायनिक खेती में खाद और कीटनाशकों पर किसान का बहुत पैसा खर्च होता है। प्राकृतिक खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी लागत लगभग शून्य होती है। किसान खुद ही अपने खेतों में खाद तैयार कर सकता है। 2026 के बजट में भी ऐसी संभावना है कि सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को विशेष प्रोत्साहन और प्रशिक्षण देगी।जलवायु परिवर्तन और खेती पर इसका असर
बदलते मौसम और कम बारिश की चुनौतियों के बीच प्राकृतिक खेती एक बड़ा समाधान बनकर उभरी है। प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसलें मौसम की मार सहने में ज़्यादा सक्षम होती हैं। मिट्टी में नमी को रोके रखने की क्षमता बढ़ती है, जिससे पानी की खपत कम होती है। भारत के कई राज्यों जैसे हिमाचल और गुजरात में इसके सफल परिणाम दिखने लगे हैं।बाजार और मुनाफे की नई राह
आज के दौर में हेल्थ-कान्शस लोग प्राकृतिक अनाज के लिए दो गुना कीमत देने को तैयार हैं। किसानों के लिए यह एक अच्छा अवसर है कि वे सीधे ग्राहकों तक अपना उत्पाद पहुँचाएं। 2026 तक सरकार ऐसे कई क्लस्टर बनाने जा रही है जहाँ से प्राकृतिक उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जाएगी।निष्कर्ष: स्वस्थ जीवन और खुशहाल किसान
प्राकृतिक खेती केवल किसान को कर्ज से मुक्ति नहीं दिलाएगी, बल्कि देश के स्वास्थ्य को भी सुधारेगी। अगर हम अपनी पारंपरिक तकनीकों को आधुनिक ज्ञान के साथ मिलाकर चलें, तो 2026 भारत की कृषि क्रांति का स्वर्णिम वर्ष साबित हो सकता है।Related Articles
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Gaurav Jha
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