Nepal Crisis:नेताओं की रईसी पर फूटा नेपाल के युवाओं का गुस्सा
नेपाल में बढ़ती बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और परिवारवाद के कारण जेन-ज़ी युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। नेताओं की ऐशो-आराम भरी जिंदगी ने इस आंदोलन को और तेज़ कर दिया।
नेपाल इन दिनों एक गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। बेरोजगारी, महंगाई और नेताओं की परिवारवादी राजनीति ने युवाओं, खासकर जेन-ज़ी (Gen Z) पीढ़ी को विद्रोह के लिए मजबूर कर दिया है।
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बेरोजगारी और असमानता की चिंगारी
नेपाल के हजारों युवा लंबे समय से बेरोजगारी और अवसरों की कमी से परेशान हैं। दूसरी ओर, सत्ता में बैठे नेताओं के बच्चे ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं। आलीशान गाड़ियां, विदेश यात्राएं और विलासिता की तस्वीरें जब सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, तो यह आम युवाओं के गुस्से की वजह बनीं। युवाओं ने संसद परिसर तक पहुंचकर नारे लगाए— “हमारा टैक्स, तुम्हारी रईसी नहीं चलेगी।”
सोशल मीडिया से सड़कों तक पहुंचा विद्रोह
पहले यह गुस्सा सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिख रहा था, लेकिन अब यह आंदोलन सड़कों तक फैल गया है। सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाकर हालात काबू करने की कोशिश की, लेकिन इससे आक्रोश और बढ़ गया। यह बगावत अब महज़ नाराज़गी का इजहार नहीं है, बल्कि इसे एक डिजिटल क्रांति कहा जा सकता है, जो युवाओं की आवाज़ को नई दिशा दे रही है।
राजनीति में गहराता परिवारवाद
नेपाल की राजनीति में परिवारवाद की जड़ें बहुत गहरी हैं। नेपाली कांग्रेस से लेकर अन्य दलों तक, नेताओं के परिजन सत्ता और पदों पर काबिज़ हैं। उदाहरण के लिए, पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के परिवार के कई सदस्य राजनीति में सक्रिय हैं। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की रिश्तेदार अंजन शक्य को नेशनल असेंबली का सदस्य बना दिया गया।
राजदूतों की नियुक्तियों पर सवाल
विदेशों में नियुक्त राजदूतों पर भी परिवारवाद और पक्षपात के आरोप लगे हैं। ऑस्ट्रेलिया के लिए महेश दहाल को राजदूत बनाया गया, जिन्हें माओवादी नेता प्रचंड का करीबी रिश्तेदार बताया जाता है। कतर में नारद भारद्वाज को भेजा गया, जो ओली के विश्वसनीय माने जाते हैं। इसी तरह, अन्य देशों में भी योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी कर नेताओं के नजदीकी लोगों को तैनात किया गया।
राष्ट्रपति और सेना प्रमुख की अपील
बढ़ते तनाव के बीच नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने आंदोलनकारियों से शांति बनाए रखने और वार्ता में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है और अब देश को गतिरोध से निकालने के लिए सभी पक्षों को साथ आना होगा।
वहीं, सेना प्रमुख अशोक राज सिगदेल ने भी जनता से संयम बरतने और राष्ट्रीय धरोहरों की रक्षा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का इस्तीफा हो चुका है, ऐसे में और जनधन की क्षति नहीं होनी चाहिए
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