पिछले कुछ हफ्तों से Siddaramaiah और DK Shivakumar के बीच सत्ता संघर्ष की ख़बरें लगातार सुर्खियों में हैं। इस बीच, वे उस स्थिति के लिए पहले से ही अपनी रणनीति तैयार कर चुके हैं यानी कि ‘यदि कांग्रेस हाईकमान DK शिवकुमार को बढ़ावा देना चाहे’ तो सिद्धारमैया का प्लान-बी क्या होगा, इसकी रूप-रेखा पहले ही लगभग तय करने की कोशिश हो चुकी है।
सिद्धारमैया के समर्थकों ने एक ऑप्शनल लिस्ट तैयार कर रखी है उन नेताओं के नाम जिनके नाम पार्टी हाईकमान के सामने मुख्यमंत्री पद के लिए रखे जा सकते हैं। इस लिस्ट में, रिपोर्ट्स के अनुसार, G Parameshwara का नाम शामिल है जो कि सिद्धारमैया के करीबियों में से एक माने जाते हैं। उनका नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह दलित नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, और कांग्रेस के भीतर सामाजिक समीकरणों को देखते हुए उनकी स्वीकार्यता को अहम माना गया है।
सिर्फ इतना ही नहीं इस प्लान को अंतिम रूप देने में उनकी बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता एक और उनकी करीबी नेता, Satish Jarkiholi ने की थी। इस बैठक में तय हुआ कि अगर शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी होती है, तो उक्त वैकल्पिक नामों को पार्टी हाईकमान के समक्ष प्रस्तावित किया जाएगा। इससे न सिर्फ शिवकुमार के दावों को चुनौति मिलेगी, बल्कि सिद्धारमैया को भी अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा।

इस रणनीति का उद्देश्य स्पष्ट है पार्टी में किसी भी प्रकार के अचानक बदलाव की स्थिति में समर्थन जुटाने वाला बैक-अप तैयार रखना। यह दिखाता है कि सिद्धारमैया गुट अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए सक्रियता से काम कर रहा है। साथ ही, यह भी पता चलता है कि कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर सिर्फ एक नेता या गुट नहीं बल्कि कई सक्रिय धड़े हैं, और सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया किसी भी समय और परिस्थिति में आकार ले सकती है।
बहरहाल जैसे-जैसे राजनीतिक घटनाक्रम आगे बढ़ेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी हाईकमान किस दिशा में मुड़ती है: क्या वह शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाती है या सिद्धारमैया के समर्थकों का बैक-अप प्लान ही काम आता है।


