स्वस्थ जीवन के लिए वापस लौटें अपनी जड़ों की ओर: पारंपरिक भारतीय आहार का जादू और विज्ञान
मिलेट्स, मसालों और आयुर्वेद के संगम से बदलें अपनी जीवनशैली - पूरी जानकारी
आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी पुरानी स्वस्थ आदतों को पीछे छोड़ आए हैं। आज जब दुनिया फिर से ‘वेलनेस’ की बात कर रही है, तो सबसे ज़्यादा चर्चा भारतीय भोजन शैली की हो रही है। जंक फूड और प्रोसेस्ड डाइट ने हमें डायबिटीज, बीपी और हार्ट की बीमारियों का तोहफा दिया है। ऐसे में स्वास्थ्य की असली कुंजी उन पारंपरिक व्यंजनों में छिपी है जो हमारी दादी-नानी के ज़माने में रसोई की शान थे।
1. मिलेट्स: पुराने ज़माने के सुपरफूड्स
ज्वार, बाजरा, रागी, और सावां जैसे अनाज आज ‘मिलेट्स’ के नाम से वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हो रहे हैं। ये अनाज ग्लूटन-फ्री होते हैं और शरीर को भरपूर ऊर्जा देते हैं। इनमें आयरन, कैल्शियम और फाइबर की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है, जो वजन कम करने और पेट साफ रखने में मदद करती है। अपनी डाइट में गेहूँ और चावल के साथ इन्हें जगह देना ही भविष्य की सेहत है।
2. भारतीय मसालों का औषधीय संसार
हमारी रसोई में रखी हल्दी महज़ एक मसाला नहीं, बल्कि एक एंटी-सेप्टिक है। काली मिर्च हाजमे के लिए उत्तम है, और जीरा शरीर को ठंडा रखता है। ये मसाले जब सही मात्रा में खाने में शामिल होते हैं, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को कई गुना बढ़ा देते हैं। विदेशी दवाओं के बजाय भारतीय मसाले बीमारियों के खिलाफ बेहतरीन ढाल हैं।
3. उपवास और खाने का समय: आयुर्वेद का ज्ञान
आयुर्वेद कहता है कि सूर्यास्त के बाद भारी भोजन से बचना चाहिए। हमारे पूर्वज सादे खाने और वक्त पर भोजन करने के आदि थे। आजकल ‘इंटरमिटेंट फास्टिंग’ का जो ट्रेंड है, वह असल में भारतीय उपवास परंपरा का ही एक रूप है। हफ्ते में एक बार हल्का भोजन करना या उपवास रखना शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन के लिए अनिवार्य है।
4. स्थानीय और मौसमी फलों की ताकत
आजकल बाज़ारों में साल के 12 महीने हर तरह के फल और सब्जियाँ मिलती हैं, जो कि अप्राकृतिक हैं। हमेशा वह फल खाएं जो आपके क्षेत्र में उस समय पैदा हो रहा हो। मौसमी सब्जियाँ ताज़ा होती हैं और उनमें पोषक तत्व भरपूर होते हैं। कोल्ड स्टोरेज में रखे फल अपनी तासीर खो देते हैं और स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
5. घी और तेल: असली बनाम नकली
मक्खन और चीज़ के चक्कर में हमने देसी घी को भुला दिया। शुद्ध गाय का घी याददाश्त बढ़ाने, जोड़ों के दर्द को दूर करने और स्किन को ग्लोइंग बनाने के लिए चमत्कारिक है। वहीं, रिफाइंड तेलों के स्थान पर सरसों, मूंगफली या नारियल का कच्ची घानी तेल इस्तेमाल करना दिल की सेहत को सुरक्षित रखता है।
6. मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का संबंध
आयुर्वेद के अनुसार, जैसा अन्न वैसा मन। जब हम सात्विक और ताज़ा भोजन करते हैं, तो हमारे विचार भी सात्विक रहते हैं। योग और प्राणायाम के साथ अगर संतुलित आहार लिया जाए, तो किसी भी बीमारी को पास आने से रोका जा सकता है।
7. सारांश: अपनी थाली को पहचानें
निष्कर्ष यह है कि हमें किसी विदेशी डाइट चार्ट की ज़रूरत नहीं है। हमारी अपनी थाली में वह सब कुछ मौजूद है जिसकी शरीर को ज़रूरत है। बस ज़रूरत है थोड़ा जागरूक होने की और अपनी पारंपरिक भोजन शैली को गर्व के साथ अपनाने की। आज ही से अपनी डाइट में बदलाव करें और एक लंबा, स्वस्थ और खुशहाल जीवन जिएं।
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Gaurav Jha
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