अमेरिकी टैरिफ के कारण भारत की सबसे बड़ी कंपनियों को 26 अरब डॉलर का नुकसान
अमेरिकी टैरिफ के चलते भारत की शीर्ष कंपनियों को भारी झटका, 26 अरब डॉलर का नुकसान, निर्यात और रोजगार पर असर, निवेशक निकासी से बाजार में और दबाव।
अमेरिकी टैरिफ के कारण भारत की सबसे बड़ी कंपनियों को अगस्त 2025 में लगभग 2.24 लाख करोड़ रुपये (लगभग 26 अरब डॉलर) का नुकसान हुआ। इस नुकसान का मुख्य कारण अमेरिका द्वारा भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाना था, जिसमें पहले से लगे 25% टैरिफ के ऊपर अतिरिक्त 25% टैरिफ जोड़ा गया। इस फैसले ने बाजार में जबरदस्त बेचैनी और बिकवाली को बढ़ावा दिया, जिससे सेंसेक्स की टॉप-10 कंपनियों में से 8 कंपनियों के मार्केट कैप में भारी गिरावट आई।
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रिलायंस और HDFC बैंक को सबसे बड़ा झटका
सबसे बड़ा नुकसान मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ, जिसका मार्केट कैप 70,707 करोड़ रुपये घटकर 18,36,424 करोड़ रुपये रह गया। इसके बाद HDFC बैंक का बाजार मूल्य कम होकर 14,60,864 करोड़ रुपये रह गया। ICICI बैंक, भारती एयरटेल, एलआईसी और अन्य प्रमुख कंपनियों के भी मूल्य में भारी गिरावट देखी गई। हालांकि, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने इस बाजार दबाव के बावजूद अपने मार्केट कैप में वृद्धि दर्ज की।
निर्यात क्षेत्रों पर टैरिफ का सीधा असर
इस टैरिफ के प्रभाव से भारतीय निर्यात पर भारी प्रभाव पड़ा, खासकर कपड़ा, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद और रसायन जैसे श्रमप्रधान क्षेत्रों में। इससे न सिर्फ कंपनियों को आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि लाखों लोगों की नौकरियां भी खतरे में आ गईं। इस आर्थिक तनाव के बीच विदेशी निवेशकों ने भी भारतीय बाजार से तेजी से निकासी की, जिससे और अधिक दबाव बना।
आर्थिक तनाव से कूटनीतिक रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं
इस मुद्दे पर भारतीय नेताओं और उद्योग जगत में भारी चिंता व्यक्त की गई है और कई लोग स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील कर रहे हैं ताकि अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम किया जा सके। इसके साथ ही, यह भी आगाह किया गया है कि ऐसे टैरिफ विवाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक और राजनयिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
यह सारी जानकारी भारत की प्रमुख कंपनियों के बाजार नुकसान और अमेरिकी टैरिफ के व्यापक प्रभाव को दर्शाती है
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