अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही दुनिया भर की निगाहें वाशिंगटन पर टिकी हैं। डोनाल्ड ट्रंप की वापसी को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन इस बीच, एक प्रमुख अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञ ने ऐसा बयान दिया है जिसने भू-राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
असली ताकत कहां है?
जाने-माने अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक इयान ब्रेमर (Ian Bremmer) का मानना है कि भले ही ट्रंप मीडिया की सुर्खियों में हों, लेकिन वास्तविक वैश्विक शक्ति का केंद्र कहीं और शिफ्ट हो चुका है। उनका कहना है, "आज की तारीख में दुनिया के दो सबसे ताकतवर नेता डोनाल्ड ट्रंप नहीं, बल्कि भारत के नरेंद्र मोदी और चीन के शी जिनपिंग हैं।"
क्यों किया ऐसा दावा?
इसके पीछे उन्होंने मजबूत तर्क भी दिए हैं। ब्रेमर के मुताबिक, पीएम मोदी और शी जिनपिंग दोनों ही अपने-अपने देशों में बेहद मजबूत स्थिति में हैं। उनके पास घरेलू समर्थन है और वे लंबे समय के लिए नीतियां बना सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राजनीति में भारी ध्रुवीकरण (polarization) है। वहां का राष्ट्रपति उतना स्वतंत्र होकर फैसले नहीं ले पा रहा, जितना कि ये दोनों एशियाई दिग्गज ले सकते हैं।
राजनीतिक स्थिरता सबसे बड़ा फैक्टर
एक्सपर्ट का कहना है कि भारत में राजनीतिक स्थिरता है, जो आर्थिक विकास को गति दे रही है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत का वैश्विक कद लगातार बढ़ा है। अमेरिकी एक्सपर्ट का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है और कूटनीतिक मोर्चे पर एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभरा है।
यह बयान साफ इशारा करता है कि दुनिया का पावर डायनेमिक्स अब पश्चिम से पूर्व की ओर झुक रहा है।











